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पीठ पर डाक का बोझ लेकर 30 किमी की पैदल यात्रा, ये है डाक विभाग का मेघदूत

मंडी, 30 जून : मौजूदा दौर में आप घर के पास वाली दुकान तक जाने के लिए भी अपनी स्कूटी का सहारा लेते हैं, आपको कोई ऐसी सरकारी नौकरी मिले, जिसमें रोजाना बोझा उठाकर 30 किमी का सफर पैदल तय करना हो, तो क्या आप ऐसी नौकरी करना पसंद करोगे। शायद नहीं। 

इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश में कई निष्ठावान कर्मचारी हैं जो ऐसी नौकरी को खुशी करते हैं। वे ये नहीं देखते कि इसके बदले में कितना वेतन मिल रहा है। 

एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क ऐसे एक शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे  हाल ही में भारत सरकार ने “मेघदूत” अवार्ड (Meghdoot Award) से सम्मानित किया है।

बोझा उठाकर रोजाना 30 किमी पैदल सफर मेघदूत
बात कर रहे हैं लाहुल स्पीति के उदयपुर उपमंडल के तहत आने वाले गौशाल गांव निवासी 56 वर्षीय प्रेम लाल की। 7वीं पास प्रेम लाल 25 मार्च 1981 से डाक विभाग में कार्यरत हैं। 1981 से 2013 तक प्रेम लाल ने गौशाल शाखा डाकघर में बतौर डाक वितरक (Postman) अपनी सेवाएं दी। 8 अक्तूबर 2013 से इन्हे डाक विभाग (Post Office) में बतौर एमटीएस यानी मल्टी टास्किंग स्टाफ (Multi Tasking Staff) के रूप में सेवाएं देने का मौका मिला।

विभाग ने प्रेम लाल (Postman Prem Lal) को उप डाकघर उदयपुर (Sub Post Office Udaipur) में बतौर विभागीय मेल रनर के पद पर तैनाती दी हुई है। प्रेम लाल रोजाना उदयपुर-शालग्रां मेल लाईन पर डाक ले जाने और वापिस लाने का काम करता है। शालग्रां में विभाग का डाकघर है और यहां तक सड़क की कोई सुविधा मौजूद नहीं है। उदयपुर से शालग्रां तक की एकतरफा दूरी 15 किमी है।

प्रेम लाल रोजाना सुबह 9 बजे उदयपुर से डाक का थैला पीठ पर लादकर शालग्रां के लिए अपनी पैदल यात्रा शुरू करता है। साढ़े चार घंटों की पैदल यात्रा के बाद दोपहर 1.30 बजे शालग्रां पहुंचता है। आधे घंटे के अंतराल में थोड़ा विश्राम करता है और फिर शालग्रां से डाक का दूसरा थैला उठाकर वापिस उदयपुर के लिए निकल पड़ता है। शाम करीब साढ़े 6 बजे उदयपुर पहुंचता है और डाक छोड़ने के बाद अपने घर जा पाता है।

रोजाना ग्लेशियरों पार करता है मेघदूत  उदयपुर-शालग्रां मेल लाइन (On Udaipur-Shalgran mail line) बर्फ से ढका क्षेत्र है। इस क्षेत्र में अक्टूबर के महीने में बर्फबारी होती है और मार्च महीने तक यह क्षेत्र बर्फ से ढका रहता है। इस लाइन पर कई ग्लेशियर और चिनाब नदी (Chenab River) की सहायक नदियां हैं। इनमें दरेड नाला, भुन नाला, ग्रेट्टू नाला और भीमबाग नाला आदि शामिल हैं। ग्लेशियरों (Glaciers) के लगातार गिरने और हिमस्खलन (Avalanche) की आशंका के कारण इस लाइन पर चलना जोखिम भरा है। लेकिन लोगों की डाक उन तक सही समय पर पहुंचे, इसलिए प्रेम लाल वर्ष भर इस रास्ते पर सफर करता है।

पहले मिल चुका है डाक सेवा अवार्ड…
प्रेम लाल को भारत सरकार ने 28 जून 2022 का मेघदूत अवार्ड से सम्मानित किया है। इससे पहले प्रेम लाल को 17 अक्तूबर 2021 को विभाग की तरफ से डाक सेवा अवार्ड मिल चुका है। यह अवार्ड मिलने के बाद ही उनका नाम मेघदूत अवार्ड के लिए भेजा गया था, जिस पर भारत सरकार ने अब इस सम्मान से नवाजा है।

मेरा काम मेरी दिनचर्या का हिस्सा और सुकून देने वाला….
मेघदूत अवार्ड से सम्मानित प्रेम लाल ने बताया कि विभाग ने उन्हें जो दायित्व सौंपा है वे उसपर खरा उतरने का प्रयास करते हैं। यह अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है और उन्हें तब ज्यादा सुकून मिलता है जब वे लोगों की जरूरी डाक उन तक पहुंचाने में कामयाब हो जाते हैं। जब तक सेवा में हूं तब तक विभाग के निर्देशों पर काम करता रहूंगा।

निष्ठावान कर्मचारियों पर विभाग को गर्व….
मंडी मंडल डाकघर के प्रवर अधीक्षक बली राम ने बताया कि उनके मंडल में कई ऐसे कठिन क्षेत्र हैं जहां पर आज भी पैदल चलकर डाक पहुंचानी पड़ती है। इस कार्य में प्रेम लाल की तरफ अन्य बहुत से निष्ठावान कर्मचारी लगातार डटे हुए हैं। विभाग को ऐसे कर्मचारियों पर गर्व है जिनकी बदौलत हम लोगों को बेहतरीन सेवाएं दे पा रहे हैं। प्रेम लाल को मेघदूत अवार्ड मिलने पर विभाग की तरफ से बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं।