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गाय का नहीं सह सके दर्द, छुट्टी रद्द कर सिजेरियन से गरीब के गौवंश को नया जीवन

राजगढ़, 16 नवंबर : उपमंडल के धार भगेड़ा गांव में गाय प्रसव पीड़ा (Labor Pain) से कराह रही थी। कई दिनों से बेहाल हो चुकी थी। धामला में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारी (Veterinary officer) डाॅ. मनोज कौशिक छुट्टी पर थे। इसी बीच फोन पर उन्हें इत्तला दी गई। फौरन ही मौके पर पहुंच कर गाय का सिजेरियन (Cesarean) करने के लिए हामी भर दी। गाय भी एक गरीब व्यक्ति की है, जिसके दूध से कुछ आमदनी (Income) हो जाती है। बता दें कि गाय की प्रसव अवधि (Delivery period)9  माह की होती है, लेकिन इस मामले में 10 महीने बीत चुके थे।

सिजेरियन ऑपरेशन के बाद बछड़े के साथ गाय

दीवाली से अगले दिन ही डाॅ. कौशिक अपनी टीम के साथ गाय के मालिक दिनेश कुमार के घर पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान पाया कि गाय को दो दिन से प्रसव पीड़ा हो रही थी। बच्चादानी के न खुल पाने से गाय शिशु को जन्म भी नहीं दे पा रही थी। स्थानीय फार्मासिस्ट निखिल वर्मा ने भी गाय का निरीक्षण किया था, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो पाया था। रविवार को करीब 4 घंटे की लंबी सर्जरी (Surgery) के बाद गाय ने बछड़े को जन्म दिया।

पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. मनोज कौशिक का कहना है कि बछड़े का वजन लगभग 40 किलो है, जो औसतन वजन (Average weight) से ज्यादा था। लिहाजा सर्जरी ही एकमात्र विकल्प (Option) था। उन्होंने माना कि वो छुट्टी पर थे। लेकिन पशु की स्थिति को देखते हुए तुरंत डयूटी पर लौट आए। उल्लेखनीय है कि समूचे इलाके में बेजुबान पशुओं को नया जीवन देने में डाॅ. कौशिक एक विशेष पहचान रखते हैं।

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