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एक को बचाने की कोशिश में गई 6 और जाने, समझाने पर भी नहीं माने…  

शिमला /ऊना, 3 अगस्त : ये दिल को पसीज देने वाली दास्तां 11 दोस्तों की है। एक दोस्त को बचाने के लिए एक के बाद एक 6 और दोस्तों ने अपने प्राणों की आहूति दे दी। रत्ती भर भी ये नहीं सोचा कि एक दोस्त को बचाने के लिए उनका जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा।

हिमाचल प्रदेश के ऊना में पेश आई दर्दनाक घटना में पंजाब के मोहाली के रहने वाले सात युवकों की मौत की खबर ने हर किसी को झिंझोड़ कर रख दिया था। पुलिस की जांच में ये सामने आया है कि पहले एक युवक डूब रहा था। उसे बचाने के लिए मानवीय श्रृंखला बना ली गई। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। 6 दोस्त भी खिंचाव के कारण पानी में डूब गए। बाहर मौजूद दो अन्य दोस्त चीखें सुनकर किनारे पर पहुंचे तो एक दोस्त ने उन्हें बचाने के लिए छलांग भी लगा दी थी। लेकिन बाहर मौजूद दूसरे दोस्त ने उसे बचा लिया।

झील में नहाने नहीं उतरे दो दोस्तों सोनू और कृष्ण लाल ने सातों को समझाने की कोशिश भी की थी कि पानी गहरा है, मत जाओ। लेकिन वो नहीं माने। झील की गहराई व वास्तविकता से अनजान थे। जांच में ये भी सामने आ रहा है कि विशाल सबसे पहले झील में उतरा। कुछ ही देर बाद जब विशाल डूबने लगा तो बाकी दोस्तों ने मानवीय श्रृंखला बनाकर उसे बचाने की कोशिश की। इसी जद्दोजहद में 6 दोस्तों ने भी अपनी जान गंवा दी।

ऐसा बताया जाता है कि गोविंद सागर झील में हर कदम पर खतरा है। एक कदम पर पानी कुछ फीट का होता है, अगले कदम पर गहराई 100 फीट से भी अधिक हो जाती है। मोहाली के रहने वाले एक बुजुर्ग सुरजीत ने इस हादसे में बेटे के साथ-साथ तीन पोते भी खो दिए हैं।

विशाल की मौत से टूट गया दिव्यांग पिता राजकुमार….  गोबिंद सागर झील के दर्दनाक हादसे में मोहाली के बनूड़ के दिव्यांग राज कुमार की मानो दुनिया ही उजड़ गई। एक नहीं पहले चार बच्चों की मौत का दर्द झेल रहे राज कुमार के लिए आखिरी उम्मीद 18 वर्षीय बेटे विशाल की मौत की खबर सुनना मानो पैरों तले जमीन खिसकने के सामान रही। गोबिंद सागर झील में समाने की खबर पाते ही विशाल का पिता राज कुमार बुरी तरह से टूट गया और ऊना तक आने की हिम्मत भी नहीं रही। किसी तरह मन को समझाकर ऊना पहुंचे राज कुमार अपने लाड़ले को देखकर बिलख पड़े।

राजकुमार की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले पा रहे थे। राज कुमार ने बताया कि एक ही बेटा होने के चलते वह उसकी हर खुशी को पूरा करने का प्रयास करते रहते थे। बेटे ने बाइक लेने की इच्छा जाहिर की, तो मैंने कर्ज पर चार माह पहले ही बाइक लेकर दी थी। जिसकी अभी तक मात्र तीन ही किस्तें ही चुका सका था और ये बड़ा हादसा मेरे बेटे को लील गया।

        मृतक विशाल के पिता राज कुमार ने बताया कि सोमवार सुबह बेटा बाबा बालक नाथ मंदिर जाने की बात कही। मैं ढाबे पर था और बेटे का फोन आया कि मैं निकल रहा हूं। आखिरी बार बेटे से फोन पर ही बात हुई, लेकिन मिल भी नहीं पाया। राज कुमार ने बताया कि विशाल से पहले मेरे चार बच्चों की मौत हो गई थी। राज कुमार के अनुसार दो बेटे व दो बेटियों की अज्ञात बीमारी के चलते जन्म के बाद तीन से चार माह में ही मौत हो जाती थी। इसके बाद जब विशाल का जन्म हुआ, तो वंश आगे बढ़ने की उम्मीद जगी, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था और मेरा ये आखिरी सहारा भी मेरे से छीन गया।

गोताखोर भूपेंद्र की मानें तो डूबने वाले युवकों ने डंडे व घास को पकड़ कर पानी से निकलने का प्रयास किया था। बुधवार को उना अस्पताल का मंजर बेहद ही दर्दनाक था। जिन बेटों को परिजनों ने सोमवार सुबह हंसते-खेलते बाबा बालक नाथ मंदिर में शीश नवाजने के लिए रुखसत किया था, आज वो उनके शव लेने पहुंचे थे।

मोहाली से 7 एंबुलेंस 7 शवों को लेने पहुंची थी। एक पिता ऐसा भी था, जिसने अपनी चार संतानों को पहले ही खो दिया था। बुढ़़ापे की अंतिम लाठी भी इस हादसे में टूट गई।