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हिमाचल को मिला पहला IVF सेंटर, सुपर स्पेशलिस्ट डॉ. योगिता डोगरा बनी सूत्रधार 

शिमला, 23 जुलाई: हिमाचल प्रदेश में पहली बार आईवीएफ तकनीक से निसंतान दंपत्ति संतान का सुख प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश में पहले अरीवा आईवीएफ सेंटर (In vitro fertilization Centre in Himachal) की शुरुआत डॉक्टर योगिता डोगरा (Dr.Yogita Dogra) द्वारा शिमला में की जा रही है। लिहाजा निःसंतान दम्पतियों को ट्रीटमेंट के लिए बाहरी राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। 

आईवीएफ विशेषज्ञ डॉक्टर योगिता डोगरा

   खास बात यह है कि डॉक्टर योगिता डोगरा स्वयं रिप्रोडक्टिव मेडिसिन में उच्च शिक्षित होने के साथ-साथ अनुभवी भी हैं। डॉक्टर डोगरा ने एम्स दिल्ली से रिप्रोडक्टिव मेडिसिन में डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन (Doctorate of Medicine) की उपाधि हासिल भी की हुई है। गौरतलब है कि आईवीएफ में सुपर स्पेशलिस्ट (Super Specialists) की संख्या देश में गिनी चुनी ही ही है। डॉ. योगिता डोगरा ने न्यू शिमला में उच्च तकनीक से लैस मॉड्यूलर प्रयोगशाला के अलावा ऑपरेशन थिएटर भी स्थापित किया है।

हिमाचल प्रदेश की पहली आईवीएफ विशेषज्ञ डॉक्टर योगिता डोगरा ने बताया कि करियर को लेकर कई विकल्प मौजूद थे, लेकिन वो अपने प्रदेश में ही सेवा करना चाहती थी। लिहाजा राजधानी में इस सेंटर की शुरुआत करने का निर्णय लिया। बता दें कि डॉ योगिता के पति डॉ रविकांत डोगरा इस समय पीजीआई चंडीगढ़ में ICU के क्षेत्र में डीएम की पढ़ाई कर रहे हैं। दीगर है कि शिमला जिला के कुमारसेन की पुत्रवधु डॉक्टर योगिता डोगरा एम्स दिल्ली से डीएम की पढ़ाई करने वाली हिमाचल की पहली स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोलॉजिस्ट) है।

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन ट्रीटमेंट को IVF ट्रीटमेंट कहा जाता है। इसे “टेस्ट-ट्यूब बेबी” के नाम से  भी जाना जाता है। बताया गया कि इस तकनीक का प्रयोग पहली बार 1978 में इंग्लैंड में किया गया था। आईवीएफ ट्रीटमेंट में प्रयोगशाला में कुछ नियंत्रित परिस्थितियों में महिला के अंडे (Eggs) और पुरुष के शुक्राणु (Sperms) को मिलाया जाता है। उल्लेखनीय है कि डॉ योगिता को आवर्तक प्रत्यारोपण विफलता (Recurrent Implantation Failure) में भी महारत हासिल है। इस वैज्ञानिक तकनीकी में आईवीएफ की असफलता के कारण का भी पता लगाया जा सकता है।     डॉ योगिता के मुताबिक अरीवा आईवीएफ सेंटर प्रदेश का पहला सुपर स्पेशलिटी केंद्र होगा।

उन्होंने बताया कि सोमवार (25 जुलाई) को वर्ल्ड आईवीफ़ डे (World IVF Day) के अवसर पर ओपीडी की सेवाएं शुरू की जा रही हैं। कृत्रिम गर्भधारण से पहले शिशु ने 25 जुलाई 1978 को जन्म लिया था। उन्होंने कहा कि वो फर्टिलिटी के क्षेत्र की उच्च शिक्षा व 14 साल के तजुर्बे को अपने ही प्रदेश को समर्पित करना चाहती थी। इसी कारण विदेश या फिर मेट्रो सिटी के विकल्प को ख़ारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि एक ही परिसर में उच्च तकनीक की तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। डॉ योगिता ने कहा कि केंद्र का वातावरण क्लीन व स्ट्रेस फ्री रहेगा।