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नए निर्मित नौहराधार महाविद्यालय में 15 जुलाई से प्रवेश प्रक्रिया शुरू

नौहराधार, 14 जुलाई : जिला सिरमौर के नौहराधार में अधिसूचित कॉलेज की एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजकीय महाविद्यालय नौहराधार में सत्र 2022-23 के लिए वीरवार को 15 जुलाई 2022 से प्रवेश प्रारम्भ होगी।

यह जानकारी देते हुए प्रधानाचार्य डॉक्टर एसके गांधी ने बताया की शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना की अनुपालना करते हुए प्रथम वर्ष हेतु दाखिले 15 जुलाई शुक्रवार से प्रारम्भ हो जाएंगे। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी प्रवेश हेतु अनिवार्य दस्तावेज के साथ राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक  विद्यालय नौहराधार के परिसर में उचित समय पर पहुंच कर प्रवेश ले सकते है। 

नौहराधार कॉलेज में ऑफ लाइन आवेदन कर सकते है। कॉलेज में दाखिला 20 जुलाई तक छात्र आवेदन कर सकते है। हालांकि 20 जुलाई के बाद भी आवेदन कर सकते है। 21 जुलाई को मेरिट लिस्ट तैयार होगी। एक अगस्त से नियमित कक्षाएं शुरू होगी। छात्र 01799 220821 व 94180 15692,9816432447,[email protected] पर भी जानकारी प्राप्त कर सकते है।

बता दें कि कई छात्र नौहराधार में कालेज में प्रवेश लेने के लिए का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। गौरतलब है कि नौहराधार में काफी लंबे समय से लोग महाविद्यालय की मांग कर रहे थे जिसकी घोषणा माननीय मुख्यमंत्री ने नौहराधार प्रवास के दौरान की।

स्थानीय ग्राम पंचायत प्रधान राजेंद्र चौहान, ग़ुमान सिंह चौहान, रविंद्र चौहान, मोरध्वज चौहान, विद्यालय प्रवक्ता संघ जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर संजीव ठाकुर दिनेश चौहान, कमल नयन चौहान, ब्रह्मनंद शर्मा, जय प्रकाश पुंडीर, आदि स्थानीय लोगो ने महाविद्यालय के प्रारम्भ होने पर माननीय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, माननीय शिक्षा मंत्री गोविन्द ठाकुर एवं  स्थानीय नेता एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति  आयोग के पूर्व अध्यक्ष बलबीर चौहान का आभार व्यक्त किया।

इस महाविद्यालय से रेणुका चुनाव क्षेत्र की 16 पंचायतों के अतिरिक्त पच्छाद चुनाव क्षेत्र की दो पंचायत छोगटाली व दीदग के विद्यार्थी भी लाभान्वित होंगे। आशा है कि इस महाविद्यालय के खुलने से दूर दराज के क्षेत्र के विद्यार्थियों को घर द्वार पर ही उच्च शिक्षा की प्राप्त होगी।

अब 16 पंचायतो के बच्चों को दूरदराज के कॉलिजों में पढ़ाई करने नही जाना पड़ेगा। अधिकतर अविभावकों को मजबूरी में अपने बच्चों को सोलन, शिमला, नाहन राजगढ़ नही भेजना पड़ेगा। अविभावकों को काफी खर्च कर अपने बच्चों की पढ़ाई करानी पड़ती थी।