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#Sirmour : कर्तव्य परायणता की अनूठी मिसाल, शिक्षकों ने छुट्टियों में बदली स्कूल की तस्वीर 

नाहन, 12 जुलाई : हिमाचल के ग्रीष्मकालीन स्कूलों में छुट्टियां (Summer Closing Schools) हैं। शिक्षक भी आनंद ले रहे हैं, लेकिन दो शिक्षक ऐसा भी है जो खस्ता हालत स्कूल की काया पलटने में लगा है। नाहन शिक्षा खंड के तहत राजकीय प्राथमिक पाठशाला रखनी (government primary school rakhni) में वेकेशन में शिक्षकों की मेहनत से स्कूल की तस्वीर बदल रही है। स्कूल का भवन (school building) पिछले कुछ सालों से खस्ताहाल चला हुआ था। 

आलम ये था कि भवन पशुशाला से भी बदतर नजर आता था। स्कूल को मिली मरम्मत की ग्रांट के शिक्षकों ने बरसात की छुट्टियों में इस्तेमाल का निर्णय लिया। अब स्कूल बेहतरीन हालत में है। स्कूल में चारों तरफ छात्रों का ध्यान आकर्षित करने के लिए पेंटिंग (Painting) बनाई गई हैं। फर्श भी ज्ञान बांट रहा है। बरसात की छुट्टियां खत्म होगी तो छात्रों को स्कूल एक नए रंग में मिलेगा।

मरम्मत के लिए स्कूल को साढ़े 4 लाख की ग्रांट मिली थी। जिसमें कमरों की मरम्मत व छत की ग्रूटिंग (roof grouting) आदि कार्य शामिल थे। इसी बजट शिक्षकों ने न केवल स्कूल में टाइल का कार्य करवाया, साथ ही शौचालयों की हालत को भी सुधारा है। स्कूल में किचन गार्डन का निर्माण भी किया गया।

इतना ही नहीं स्कूल में शेष हिस्से पर लेंटर भी डाले गए हैं। वही स्कूल के चारों तरफ रंग रोगन का कार्य व बेहतरीन पेंटिंग की गई है। ये सब शिक्षकों की मेहनत व ईमानदारी के कारण संभव हुआ है। बजट के एक -एक रूपये का इस्तेमाल शानदार तरीके से किया गया है। 

अलख जगाने के बाद बनता है कारवां… कहते हैं, यदि कुछ अच्छा कार्य करने की नियत हो तो आपको सहयोग जरूर मिलता है। राजकीय प्राथमिक पाठशाला रखनी में चल रहे मरम्मत कार्य में राजकीय प्राथमिक पाठशाला बाना सेर में तैनात जेबीटी शिक्षक ललित तोमर का भी सहयोग मिल गया। शिक्षक ललित तोमर शानदार पेंटिंग करते हैं। उन्होंने अपनी कला स्कूल की दीवारों पर प्रदर्शित की और स्कूल की दीवारों पर नि शुल्क ही ज्ञानवर्धन तस्वीरों को उकेरा है।

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 हौसले में नहीं कमी… राजकीय प्राथमिक पाठशाला रखनी की बात करें तो मात्र 2 शिक्षक हैं, उर्मिला कुमारी मुख्याध्यापिका(headmistress) है और,अरुण कुमार जेबीटी के पद पर तैनात है। ये शिक्षक दिन-रात स्कूल की हालत को सुधारने में लगे हुए हैं। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्कूल में छात्रों की संख्या का आंकड़ा गिर रहा था। आलम यह था कि स्कूल में मात्र 6 छात्र ही बचे थे, लेकिन शिक्षकों के मेहनत रंग लाई। मौजूदा में छात्रों की संख्या 35 पार कर गई है। इसके अलावा स्कूल में प्री प्राइमरी (pre primary) की कक्षाएं भी चल रही है।

सरकार ने बंद कर दिया था स्कूल….
प्राप्त जानकारी के अनुसार स्कूल में प्रतिवर्ष घट रही छात्रों की संख्या को देखते हुए सरकार ने स्कूल को बंद कर दिया था। 2017 में फरवरी माह (February month) तक स्कूल में मात्र 6 छात्र (only six students) ही बचे थे, जिसके बाद सरकार ने स्कूल को बंद कर दिया था। करीब 6 महीने तक स्कूल बंद रहा, लोगों की मांग पर रि ओपन (Reopen) किया गया। अब शिक्षकों की मेहनत से न केवल छात्रों की संख्या बढ़ रही है। साथ ही स्कूल की हालत भी सुधर रही है।

उधर, जिला परियोजना अधिकारी(District Project Officer) ऋषि पाल ने जब टीम के साथ राजकीय प्राथमिक पाठशाला रखनी का दौरा किया तो वह स्कूल में हुए बदलाव को देखकर हैरान हो गए। उन्होंने पाया कि जो स्कूल पहले पशुशाला बन चुका था, वो निजी स्कूल से कम नहीं लग रहा है। 

    परियोजना अधिकारी ने बताया कि स्कूल को मिली ग्रांट का शानदार इस्तेमाल किया गया है। यह कार्य स्कूल की छुट्टियों में किया गया है, जिससे स्कूल का स्टाफ बधाई का पात्र है। उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षकों ने ग्रांट व इको क्लब के पैसे का सही प्रयोग किया है, जो कि स्कूल में साफ झलकता है।