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सिरमौर  : मुख्यमंत्री शगुन योजना की सहायता से संभव हुआ महेंद्र पाल की बेटी का विवाह

पांवटा साहिब, 10 जुलाई :  हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा दूरदर्शी सोच के साथ जनहित में आमजन को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न कल्याणकारी एवं विकासात्मक योजना चलाई गई है। इन योजनाओं के कार्यान्वयन से हर ओर विकास तथा खुशहाली की धारा बह रही है, साथ ही इन योजनाओं का लाभ प्रदेश के आमजन तक किसी न किसी रूप में पहुंच रहा है, बल्कि जरूरतमंद लोगों को योजनाओं का आर्थिक लाभ पारदर्शिता के साथ सीधे तौर पर उनके बैंक खातों में प्राप्त हो रहा है।

इसी दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा बीपीएल परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक मदद प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश में मुख्यमंत्री शगुन योजना चलाई गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से बीपीएल परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहायता के रूप में प्रदेश सरकार द्वारा 31000 रूपये की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री शगुन योजना के माध्यम से गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे बहुत से जरूरतमंद परिवारों की बेटियां इस योजना से लाभान्वित हो रही है।

ऐसे ही मुख्यमंत्री शगुन योजना के लाभार्थी रणदीप कौर के पिता महेंद्र पाल, जोकि जिला सिरमौर के पांवटा साहिब की ग्राम पंचायत बद्रीपुर के रहने वाले हैं तथा बी.पी.एल. परिवार से संबंध रखते हैं, ने बताया कि वह पांवटा साहिब में लकड़ी की दुकान पर कार्य करते हैं, जिसकी आय से वह अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

उन्होंने बताया कि उनके परिवार में छ: सदस्य है, जिसमें उनकी बड़ी बेटी की उम्र विवाह योग्य होने पर उसके विवाह की चिंता उन्हें सताने लगी, परंतु आय सीमित होने के कारण बेटी के विवाह योग्य पर्याप्त धनराशि जुटा पाना उनके लिए असंभव हो रहा था, जिस कारण उन्हें अपनी बेटी के विवाह के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।

उन्होंने ने बताया कि वह अपनी पुत्री के विवाह हेतु धन का प्रबंध कर रहे थे, इसी दौरान वह ग्राम पंचायत  प्रधान के संपर्क में आए, जिन्होंने महेंद्र पाल को बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री शगुन योजना के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से बी.पी.एल. परिवारों की जरूरतमंद बेटियों के विवाह हेतु 31000 रुपये की अनुदान राशि देने का प्रावधान किया गया है।

यह जानकारी प्राप्त होने के उपरांत उन्होंने बाल विकास परियोजना अधिकारी पांवटा साहिब के कार्यालय में जाकर मुख्यमंत्री शगुन योजना के विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अपनी बेटी के विवाह के लिए मुख्यमंत्री शगुन योजना के अंतर्गत मिलने वाली अनुदान राशि हेतु बाल विकास परियोजना अधिकारी पांवटा साहिब के कार्यालय में वांछित दस्तावेजों सहित निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन किया।

उन्होंने बताया कि सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरांत बिना दौड़-भाग किए कुछ ही दिनों में पारदर्शिता के साथ उनके बैंक खाते में 31000 रूपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि बेटी के विवाह के लिए प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री शगुन योजना के तहत प्राप्त अनुदान राशि से उन्होंने अपनी बेटी का विवाह बड़ी धूमधाम के साथ किया। महेंद्र पाल ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि इस प्रकार से उन्हें अपनी बेटी के विवाह हेतु इतनी राशि बिना किसी मुश्किल के प्राप्त होगी।

उन्होंने कहा कि बेटियों के विवाह में शगुन  का बहुत बड़ा महत्व है, जिसके लिए उन्होंने स्वयं तथा अपने परिवार की ओर से गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में अनुदान राशि प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई गई मुख्यमंत्री शगुन योजना के लिए प्रदेश सरकार तथा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का तहे दिल से आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री शगुन योजना की जानकारी देते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी पांवटा साहिब रूपेश तोमर ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत पांवटा साहिब  कार्यालय के माध्यम से प्रदेश सरकार द्वारा 204 बेटियों को अनुदान के रूप में 63 लाख 24 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री शगुन योजना का लाभ प्राप्त करने लिए वधू की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए और वर की आयु 21 वर्ष से अधिक तथा बी.पी.एल. परिवार से होना अनिवार्य है। इस के अतिरिक्त बालिका का विवाह राज्य से बाहर होने की स्थिति में भी इस योजना का लाभ मिलता है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय में या आंगनवाडी वर्कर तथा सुपरवाईज़र के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन कर सकते हैं। 

आवेदन करने के उपरांत सम्बन्धित अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत विवाह से दो महीने पहले या विवाह के छः महीने के भीतर भी आवेदन कर सकते हैं। आवेदन स्वीकृत होने के बाद योजना के अंतर्गत मिलने वाली अनुदान राशि का भुगतान आवेदक के बैंक खाते में कर दिया जाता है।