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दिल्ली रवाना हुए यूक्रेन में MBBS की पढ़ाई छोड़ भारत लौटे छात्रों के अभिभावक…

ऊना, 05 जुलाई : युद्ध की परिस्थितियों के बीच यूक्रेन में डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़कर भारत वापस लौटने वाले छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों में भविष्य को लेकर चिंताएं विकराल रूप धारण करने लगी हैं। लंबे अरसे से सभी छात्र छात्राओं को भारतीय मेडिकल कॉलेजों में दाखिला देने की मांग कर रहे है। अभिभावकों ने अपनी मांग के लिए अब धरना प्रदर्शन के रास्ते को चुना है।

सोमवार देर रात दौलतपुर चौक से दिल्ली के बीच चलने वाली हिमाचल एक्सप्रेस रेलगाड़ी के माध्यम से इन तमाम छात्र छात्राओं के अभिभावकों ने दिल्ली में धरना प्रदर्शन करते हुए अपनी आवाज बुलंद करने को रवाना हुए। 

अभिभावकों ने कहा कि इस मांग को लेकर वे पहले भी सरकार के समक्ष आवाज उठा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पूरी तरह से अनसुना किया गया है। लिहाजा उन्हें अब संघर्ष के रास्ते पर चलने को मजबूर होना पड़ा है। अभिभावकों में ब्रजेश शर्मा और संजीव कुमार ने कहा कि उनके बच्चों ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं में खुद को साबित किया है, जिसके बाद उन्हें यूक्रेन में पढ़ने के लिए भेजा गया। अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी अपने बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर दी है, लेकिन अब उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार के कई नुमाइंदों के पास यूक्रेन से लौटे बच्चों के अभिभावक अपनी बात रख चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी ने उनकी सुनवाई नहीं की। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके बच्चों का भविष्य उजड़ने नहीं देंगे।

यूक्रेन में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा शिल्पा वर्मा ने कहा कि महज 3 महीने उनकी पढ़ाई नियमित तरीके से चली, जिसके बाद युद्ध के कारण उन्हें वापस भारत लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें भारतीय मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई का मौका दें ताकि वह अपना भविष्य संवार सकें।