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शिमला : अंगदान के प्रति जागरूकता में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण : डॉ महाजन

शिमला,04 जुलाई : शिमला जनपद के संजौली कॉलेज में स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) हिमाचल प्रदेश व युवाह (YOUVAH) संस्था की ओर से अंगदान के विषय पर जागरूकता का कार्यक्रम आयोजित किया । इसमें युवाह संस्था के करीब 60 से अधिक प्रतिभागी मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से भाग ले रहे 60 प्रतिभागियों ने अंगदान करने की शपथ ली। 

इस मौके पर स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) हिमाचल प्रदेश के नोडल अधिकारी व आईजीएमसी के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. पुनीत महाजन ने अंगदान के विषय में प्रतिभागियों को अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि मरने के बाद भी व्यक्ति अपने आप को दूसरे के शरीर में जिंदा रख सकता है। यह अंगदान से संभव हो सकता है। अंगदान से व्यक्ति एक नहीं बल्कि 8 लोगों का जीवन बचा सकता है। हमारे देश में अंगदान की कमी के कारण लाखों लोग मौत के मुंह में चले जाते हैं।

रोजाना हजारों लोग सड़क दुर्घटना के कारण मर जाते हैं। इनमें से कई लोग अंगदान करने के लिए सक्षम होते हैं, लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से अंग दान नहीं हो पाता । वहीं, दूसरी ओर देश में हर साल करीब दो लाख लोगों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। बदलती जीवन शैली के चलते ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय की बीमारी, ब्रेन स्ट्रोक व फेफड़े की बीमारियां बढ़ती जा रही है। इसकी वजह से किडनी हार्ट और लीवर बड़ी संख्या में फेल हो रहे हैं। 

उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि कई बार मरीज के तीमारदारों में भ्रम होता है कि अंगदान करवाने के चलते डॉक्टर उनके मरीज को ठीक करने की कोशिश नहीं करेंगे,जबकि यह धारणा बिल्कुल गलत है। अस्पताल में इलाज करने वाले डॉक्टर मरीज को हर संभव मेडिकल इलाज उपलब्ध करवाते हैं। इसके बावजूद अगर मरीज में इंप्रूवमेंट नहीं होती है और मरीज ब्रेन डैड की स्थिति में पहुंच जाता है तभी अंगदान के बारे में तीमारदारों को अवगत करवाया जाता है। तीमारदारों की रजामंदी के बाद ही मरीज के शरीर से अंग निकाले जाते हैं। साथ ही कई बार तीमारदारों की धारणा होती है कि ब्रेन डेड होने के बाद भी मरीज वापस जिंदा हो सकता है। 

उन्होंने बताया कि मरीज कोमा से वापस आ सकता है लेकिन ब्रेन डेड होने के बाद उसका रिकवर होना असंभव है। वही लोगों को लगता है कि अमीर मरीजों की जान बचाने के लिए ब्रेन डेड की स्थिति में चल रहे मरीज से अंग लिए जाएंगे जबकि निकाले गए अंगों को दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपित करने से पहले कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं। अंग दाता और अंग लेने वाले मरीज के ब्लड सैंपल मैच किए जाते हैं। टिशु टाइपिंग, ऑर्गन साइज, मेडिकल अर्जेंसी, वेटिंग टाइम और भौगोलिक स्थिति के आधार पर दान किए गए अंग दूसरे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। अस्पताल में ब्रेन डेट डिक्लेअर करने वाली कमेटी उपलब्ध होती है। अस्पताल के किसी भी वार्ड के आईसीयू में अगर कोई मरीज ब्रेन डेड की स्थिति में पहुंचता है तो ब्रेन डेथ कमेटी एक्टिवेट हो जाती है। 

यह कमेटी आगामी 36 घंटे के भीतर मरीज की पूरी तरह से मॉनिटरिंग करती है पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद ही मरीज को ब्रेन डेड डिक्लेअर किया जाता है। उन्होंने बताया कि समय रहते गलत धारणाओं और अंगदान के प्रति फैले भ्रम को दूर किया जाना चाहिए ताकि लोग मरने के बाद किसी और की जीवन में उजाला कर सकें। उन्होंने कहा कि युवाह संस्था से जुड़े युवा समाज में लोगों को अंगदान करने के लिए लगातार जागरूक करने में सहयोग कर रहे हैं जो कि एक सराहनीय प्रयास है। युवा अवस्था में जहां आजकल के युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं।

वही, इस संस्था के युवा स्वस्थ समाज बनाने में अपनी भागीदारी दे रहे हैं।कार्यक्रम में युवा संस्था के अध्यक्ष सुमित ठाकुर, कार्यकारी निदेशक ललित कुमार डोगरा, संयोजक सुधांशु ठाकुर, महासचिव कपिल देव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सिद्धांत चौहान, उपाध्यक्ष साक्षी धीमान, संयुक्त सचिव हर्षदीप कौर व व रवीना खत्री, कोषाध्यक्ष भार्गव तोमर, सहयोगी कोषाध्यक्ष नेहा शर्मा, मीडिया प्रभारी दीक्षित, कार्यक्रम प्रभारी जय राज, सहयोगी कार्यक्रम प्रभारी रितु सहित सोटो के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार और प्रोग्राम असिस्टेंट भारती कश्यप मौजूद रही।

नुक्कड़ नाटक से समझाया अंग दान का महत्व

कॉलेज में कार्यक्रम संपन्न होने के बाद संजौली चौक पर युवाह के प्रतिभागियों ने अंगदान की महत्वता को दर्शाता हुआ नुक्कड़ नाटक पेश किया। कार्यक्रम देखने के लिए चौक में भीड़ एकत्रित हुई। प्रतिभागियों ने नाटक के माध्यम से समझाया कि व्यक्ति ब्रेन डेड की स्थिति में अंगदान करने के लिए सक्षम होता है। ऐसी स्थिति में अगर अंग दान किए जाएं तो एक साथ 8 लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।

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