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शिमला के तारा हॉल स्कूल में वार्षिक परीक्षा स्थगित करने का विरोध

शिमला, 15 नवम्बर : छात्र अभिभावक मंच ने शिमला के प्रतिष्ठित निजी तारा हॉल स्कूल द्वारा 20 नवम्बर से शुरू होने वाले फाइनल एग्जाम को स्थगित करने की कड़ी निंदा की है तथा राज्य सरकार से इस मामले पर हस्तक्षेप करके इन्हें समय पर करवाने की मांग की है। 
मंच के संयोजक विजेंद्र मेहर ने फाइनल एग्जाम की तिथि को स्थगित करने के कदम को तानाशाही व लूट तंत्र करार दिया है। उन्होंने कहा है कि निजी स्कूल सभी चार्जेज सहित पूरी फीस वसूली के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं, ताकि फीस वसूली को जायज ठहराया जा सके। यह केवल मनमानी लूट को सुनिश्चित करने का तरीका है। सब जानते हैं कि फरवरी शिमला में बेहद ठंड का महीना होता है व इस दौरान बर्फबारी आम बात है। बेहद ठंडे मौसम के कारण इस समय कोरोना जैसे सभी प्रकार के वायरल संक्रमण का खतरा भी कई गुणा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि स्कूल का यह तर्क कि फरवरी में ऑनलाइन के बजाए स्कूल में परीक्षाएँ करवाई जाएंगी पूरी तरह अवैज्ञानिक व तर्कहीन है। इस से बच्चों, अध्यापकों व कर्मचारियों की जान पर खतरा कई गुणा बढ़ जाएगा। तारा हॉल स्कूल को सरकारी स्कूलों से सबक लेना चाहिए, जिन्हें खोलते ही कोरोना संक्रमण चरम पर पहुंच गया था व जिन्हें दोबारा से 25 नवम्बर तक बन्द करना पड़ा। इसलिए फरवरी में फिजिकल एग्जाम की सोच ही बेबुनियादी है। इसके बावजूद वार्षिक परीक्षाओं को स्थगित किया जा रहा है। इसके पीछे केवल एक ही कारण है और वह पूर्ण फीस वसूली व अभिभावकों की मनमानी लूट करने का है।
उन्होंने तारा हॉल स्कूल के इस निर्णय को बेहद हास्यास्पद व बचकाना करार दिया है। एक तरफ उच्च शिक्षण संस्थानों ने अपने छात्रों को बिना परीक्षाओं के ही प्रोमोट कर दिया वहीं दूसरी ओर निजी स्कूल अपनी मनमानी के लिए छोटे बच्चों की जिंदगी से खेलने में भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
विजेंद्र मेहरा ने आगे कहा कि तारा हॉल स्कूल प्रबंधन तानाशाही कर रहा है। उसने 20 नवम्बर से शुरू होने वाली वार्षिक परीक्षाओं को स्थगित करके 8 फरवरी से इसे करने का आदेश जारी कर दिया है जोकि पूर्णतः छात्र व अभिभावक विरोधी है। यह सब केवल अपनी आर्थिक लूट को जारी रखने का पैंतरा है।
उन्होंने सवाल किया है कि वार्षिक परीक्षाओं को तीन महीने तक टालने के पीछे क्या बुनियादी मकसद है। उन्होंने इसे छात्रों व अभिभावकों की मानसिक प्रताड़ना करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस से निजी स्कूलों की पोल खुल गयी है। एक तरफ ये स्कूल निरन्तर ऑनलाइन क्लासेज की डींगें हांक रहे थे और दूसरी ओर समय से वार्षिक परीक्षाएं न करवाने से स्पष्ट हो गया है कि निजी स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर केवल औपचारिकता की है। अगर निजी स्कूलों ने वास्तव में ही निरन्तर ऑनलाइन कक्षाएं सुनिश्चित की हैं व उनका पाठयक्रम पूर्ण हो चुका है तो फिर वार्षिक परीक्षाओं की तिथि आगे ले जाने का क्या मतलब है।
कहा कि बच्चे व अभिभावक कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं के कारण पिछले नौ महीने से भारी मानसिक तनाव में हैं। समय पर वार्षिक परीक्षाएं होने से इस तनाव से उन्हें मुक्ति मिलती। परीक्षाओं को तीन महीने के लिए टालने से एक तरफ छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक तनाव होगा वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। इस से अध्यापकों की भी मानसिक परेशानी बढ़ना तय है। निजी स्कूल प्रबंधन पूर्ण फीस वसूली,अपनी आर्थिक लूट व मनमानी सुनिश्चित करने के लिए छात्रों,अभिभावकों,अध्यापकों व कर्मचारियों सभी को बेवजह परेशान कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार व शिक्षा विभाग से मांग की है कि बिल्कुल अंतिम समय में वार्षिक परीक्षाओं को रद्द करने व उन्हें फरवरी तक स्थगित करने के निर्णय को वापिस करवाने के लिए तारा हॉल स्कूल प्रबंधन को सख्त आदेश जारी किए जाएं व परीक्षाएं निर्धारित समय व शेडयूल पर करवाई जाएं।

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