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हिमाचली की सफलता: टयूशन सैंटर में मात्र एक छात्र से बनी है अभिलाषी यूनिवर्सिटी

शिमला, 14 नवंबर : हर कोई शिक्षा के क्षेत्र में अभिलाषी शिक्षण समूह (Abhilashi Group of Institutions) से परिचित है। मगर शायद ही कोई इस समूह की सफलता के मूल मंत्र से वाकिफ हो। संयुक्त परिवार (Joint Family) ही ग्रुप की सफलता का राज है।

   हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग (HP Education Department)  से रिटायर्ड हैड मास्टर (Retd. Head Master) दिवंगत तुलसी राम अभिलाषी ने एक सपना देखा था, जिसे तीन बेटे मिलकर साकार कर रहे  हैं। आज कोसों मील में फैले परिसर (Campus spread over miles) को देखकर शायद ही कोई विश्वास (Trust) करेगा कि रिटायर्ड हैड मास्टर ने नेरचौक में एक टयूशन सैंटर (Tuition Centre) से नींव रखी थी।

  36 दिन तक मात्र एक स्टुडेंट (Student) को ही पढ़ाया, इस समय लगभग 4 हजार छात्र अपने भविष्य को संवारने के मकसद से अभिलाषी परिसर में अध्ययनरत (Studying) हैं। दिवंगत तुलसी राम अभिलाषी ने 31 अक्तूबर 1998 को सेवानिवृत होने के बाद ट्यूशन सेंटर खोला इसके बाद  21 मई 2001 अभिलाषी सोसायटी का पंजीकरण (Registration) किया।

संयुक्त परिवार…
मौजूदा परिदृश्य में अक्सर ही परिवार बिखरे हुए (Family Scattered) नजर आते हैं। मगर यह भी तय है कि जो परिवार संयुक्त रहकर अपने मकसद (Motive) में आगे बढ़ते हैं, वो बुलंदियों (Success) को छूते हैं। इसका उदाहरण अभिलाषी भाईयों की तिकड़ी (triples) ने भी पेश किया है।

सबसे बड़े भाई डाॅ. आरके अभिलाषी(49) बतौर चेयरमैन जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जबकि डाॅ. ललित अभिलाषी व डाॅ. संजीव अभिलाषी भी अहम जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं। तीनों भाईयों के सौम्य स्वभाव की बदौलत भी एक टयूशन सैंटर आज अभिलाषी यूनिवर्सिटी बन चुका है।

परिवार चकाचौंध से भी दूर है। तीनो ही भाई ने  छात्रों के होस्टल के नजदीक ही अपने आवास रखे हुए है। ताकि खाने की गुणवत्ता के साथ साथ स्टूडेंट्स के बीच सौहार्द भी कायम रखा जा सके।

जेबीटी से चेयरमैन तक का सफर…
अभिलाषी ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूशन (Abhilash Group of Institution) के चेयरमैन (Chairman) डाॅ. आरके अभिलाषी ने अपने जीवन की शुरूआत एक जेबीटी (JBT) के तौर पर की है। पांच साल तक वो जेबीटी रहे। बीएड करने के बाद टीजीटी (TGT) हुए, फिर समाजशास्त्र व अर्थशास्त्र में पीजी (PG in Sociology and economics) करने के बाद स्कूल लेक्चरर (School Lecturer) भी बन गए। 15 दिसंबर 2005 को पिता (father) का निधन (Death) हो गया था।

छात्रो से बात करते चेयरमैन डॉ अभिलाषी 

    पिता के निधन के बाद जैसे-तैसे तीन साल सरकारी नौकरी (Government Service) जारी रखी। इसी बीच टयूशन सैंटर एक शानदार शैक्षणिक संस्थान(Educational institution) के रूप में उभर चुका था, लिहाजा 2008 में सरकारी नौकरी छोड़कर अभिलाषी शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी में भाईयों के साथ आ खडे़ हुए। बता दें कि सरकारी नौकरी के दौरान ही डाॅ. आर के अभिलाषी ने पीएचडी  (Ph.D) की उपाधि भी प्राप्त की थी।

पहले हिमाचली की सफलता…
मौजूदा में हिमाचल में निजी क्षेत्र में 16 विश्वविद्यालय बन चुके हैं, मगर अभिलाषी ग्रुप पहला है, जिसे हिमाचली द्वारा ही संचालित किया जा रहा है। अन्यथा, अधिकतर का संबंध हरियाणा व अन्य पड़ोसी राज्यों से है।

ऐसे तय हुआ 22 साल का सफर…
1998 में टयूशन सैंटर को नेरचौक में खोला गया। इसके बाद साईंस व काॅमर्स (Science and Commerce) की जमा एक व जमा दो की कक्षाएं शुरू की गई। शुरुआती दौर में (Initial stage) ही स्कूल के छात्र ने हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की मैरिट में प्रथम स्थान हासिल किया।

 2003 में बीएड काॅलेज (B.Ed) की नींव रखी गई। 2006 में फार्मेसी कोर्स शुरू हुआ। 2007 में अभिलाषी स्कूल ऑफ साईंस में फिजिक्स व कैमिस्ट्री (Physics and Chemistry) में एमएससी (SMC) की कक्षाएं शुरू की।

अगला कदम 2009 में इंजीनियरिंग काॅलेज का था। 2010 में चैलचौक परिसर की नींव पड़ी, जो 2014 में अभिलाषी यूनिवर्सिटी का कैंपस (Campus) बना। बता दें कि शिक्षा के जगत में अभिलाषी ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूशन्स को समूह का दर्जा इस कारण मिला है, क्योंकि अलग-अलग संस्थानों के अलावा यूनिवर्सिटी भी है।

दिवंगत तुलसी राम अभिलाषी ने 31 अक्तूबर 1998 को सेवानिवृत होने के बाद ट्यूशन सेंटर खोला इसके बाद  21 मई 2001 अभिलाषी सोसायटी का पंजीकरण  किया।

निरंकारी मिशन…
लंबे अरसे से परिवार निरंकारी मिशन (Nirankari Mission) से जुड़ा हुआ है। चेयरमैन डाॅ. आरके अभिलाषी का कहना है कि सतगुरू के आशीष से सफलता मिली है। अब केवल हिमाचल में क्वालिटी एजुकेशन (Quality Education) ही एकमात्र ध्येय है। 7 मार्च 1972 को जन्में डाॅ. आरके अभिलाषी का कहना है कि जीवन में काफी कठिन परिस्थितियों का सामना किया है।
650 को रोजगार…
अभिलाषी ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूशन ने करीब 650 लोगों को रोजगार भी प्रदान किया हुआ है। इसमें से 600 के करीब कर्मचारियों को पे-रोल (Pay Roll) पर रखा गया है। इसके अलावा आउटसोर्स (Out Source) पर भी कर्मचारियों की नियुक्ति हुई है।

अहम बात यह है कि 90 फीसदी हिमाचलियों को समूह द्वारा रोजगार (Employment) दिया गया है। चूंकि नेरचौक के समीप एक छोटे से गांव में जन्में अभिलाषी परिवार ने इस समूह को खड़ा किया है, यही कारण है कि कैंपस भी प्रदेश की सीमा पर नहीं है। अगर गौर किया जाए तो अधिकतर शैक्षणिक संस्थान राज्य की सीमाओं पर ही हैं।

सामाजिक सरोकार…
अभिलाषी समूह का सामाजिक सरोकार (Social interest) से भी गहरा रिश्ता है। 12 नवंबर 2020 को ही चैलचौक में 60 बिस्तरों का अस्पताल शुरू किया है। इसके पीछे मकसद ये था कि रिमोट इलाकों(Remote areas) को मेडिकल सुविधा (Medical facility) से वंचित रहना पड़ता है। इसके अलावा रक्तदान शिविर(Blood donation camp) नियमित प्रक्रिया हो चुकी है। वहीं जरूरतमंद लोगों की इम्दाद भी बढ़-चढ़कर की जाती है।

  मुख्यमंत्री या फिर प्रधानमंत्री राहत कोष की बात हो तो हर आपदा में समूह अग्रणी भूमिका निभाता है। चूंकि समूह के चेयरमैन डाॅ. आरके अभिलाषी निरंकारी मिशन के जोनल इंचार्ज भी हैं, यही कारण है कि जरूरतमंदों से सीधा नाता होता है।

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