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हाईकोर्ट के आदेश : कुल्लू के नामी प्ले स्कूल को लौटानी होगी बच्चो की फीस, नहीं चलेगा स्कूल….

एमबीएम न्यूज़ /शिमला 
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में कुल्लू के ढालपुर स्थित ” ऑवर लेडी ऑफ स्नो किंडर गार्टन” के प्रधानाचार्य को छात्रों से एकत्रित की गई फीस लौटाने के आदेश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने इस मामले पर 22 अप्रैल 2019 का स्टे भी हटा दिया है। इसमें न्यायालय ने किंडर गार्टन को बंद करने के लिए जारी जिला दंडाधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी थी।
मुख्य न्यायाधीश वी रामासुब्रह्मण्यम व न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किये है। आदेश जिला कार्यक्रम अधिकारी कुल्लू द्वारा स्कूल को जारी नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर पारित किए हैं। स्कूल के प्रधानाचार्य ने जिला दंडाधिकारी के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। तत्कालीन उपायुक्त यूनस द्वारा गठित निरीक्षण समिति ने अवलोकनओं के आधार पर जिला कार्यक्रम अधिकारी ने स्कूल के प्रधानाचार्य को 15 दिन के भीतर स्कूल शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। स्कूल में निरीक्षण के दौरान वेंटिलेशन,प्ले एरिया,चाइल्ड फ्रेंडली शौचालय इत्यादि की खामियां पाई गई थी। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने प्रधानाचार्य को सुरक्षित स्थान पर स्कूल स्थानांतरित करने को कहा था,जहां तमाम सुविधाएं उपलब्ध हो। 
प्रधानाचार्य की याचिका पर उच्च न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुल्लू के सचिव को विद्यालय का निरीक्षण करने का के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। आदेश में कहा गया था कि सचिव इस बात को लेकर निरीक्षण करें कि क्या स्कूल में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा विनियामक दिशा निर्देशों के तहत स्कूल प्रबंधन द्वारा सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई है या नहीं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की निरीक्षण रिपोर्ट में कर्मचारियों के भवन,घंटों की न्यूनतम संख्या, पुस्तकालय व भौतिक सुरक्षा आदि के संबंध में कई खामियां को रिपोर्ट में इंगित किया गया। अदालत ने साफ किया है कि मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के लिए स्कूल को जारी रखने अनुमति नहीं दी जा सकती,लिहाजा याचिका पर लगे स्टे को भी हटाया जा रहा है। दीगर बात है कि उपायुक्त यूनस के नेतृत्व में कुल्लू के निजी स्कूलों पर शिकंजा कसा गया था। समूचे प्रदेश में कुल्लू ही एक ऐसा जिला था,जहां प्रशासन ने सख्ती से कार्रवाई की थी। प्ले स्कूल में निरीक्षण के दौरान 240 बच्चों के दाखिले पाए गए थे,क्योंकि स्कूल में 0 से 3 साल के बच्चों के दाखिले किए गए थे, लिहाजा जिला कार्यक्रम अधिकारी(आईसीडीएस) को जिला दंडाधिकारी के आदेश क्रियान्वित करने के निर्देश मिले थे। जिला दंडाधिकारी ने अपने आदेश में यह भी लिखा था कि स्कूल ने करीब 200 मीटर की दूरी पर परिसर में प्ले स्कूल संचालित करने को लेकर भी अनुमति के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं की थी।
इस लिंक पर पढ़े, 30 मार्च 2019 को प्रकाशित खबर :
ये थे आदेश
28 मार्च 2019 को कुल्लू के तत्कालीन जिला दंडाधिकारी यूनुस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए इस स्कूल को बंद करने के आदेश दिए हैं। यूनुस ने स्कूल कुल्लू का औचक निरीक्षण किया था और निरीक्षण के दौरान स्कूल के संचालन में अनेक प्रकार की खामियां पाई गई। निरीक्षण में खुलासा हुआ था कि प्ले स्कूल अपने मुख्य परिसर से लगभग 250 मीटर की दूरी पर एक व्यवसायिक भवन की एक मात्र मंजिल में संचालित किया जा रहा है। स्कूल द्वारा प्रस्तुत किए गए रिकॉर्ड के अनुसार प्ले स्कूल में लगभग 240 बच्चों का नामांकन किया गया है। स्कूल के अनाधिकृत तौर पर किए जा रहे संचालन को लेकर अनेक शिकायतें आ रही थी। मौखिक और लिखित निर्देशों के बावजूद स्कूल शासन प्ले स्कूल को व्यवसायिक भवन में इसके संचालन के लिए सक्षम अधिकारियों की मंजूरी तथा पंजीकरण प्रस्तुत नहीं कर पाया। इससे स्पष्ट है कि स्कूल प्रबंधन अथवा प्रशासन के पास प्ले स्कूल के संचालन के लिए किसी प्रकार की अनिवार्य मंजूरी व अनुमति नहीं है जो भारत सरकार के राष्ट्रीय आयोग द्वारा बाल अधिकार संरक्षण के लिए तैयार किए गए विनियमन दिशा-निर्देशों का स्पष्ट रूप से उल्लंघन है। उपायुक्त के बच्चों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए इस अनाधिकृत तौर पर संचालित किए जा रहे प्ले स्कूल को 15 दिन के अंदर बंद कर दूसरी जगह शिफ्ट करने के आदेश दिए थे।

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