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हिमाचल की बेटी IPS मोनिका Lady सिंघम बनने को तैयार, MBBS के बाद क्यों पहनी खाकी…

नाहन (रेणु कश्यप) : बेटी है अनमोल, इन शब्दों को 2014 बैच की आईपीएस अधिकारी डॉ. मोनिका सही मायनों में चरितार्थ कर रही हैं। माता-पिता की इकलौती बेटी ने जीवन में मुकाम हासिल कर साबित कर दिया है कि बेटियां वास्तव में अनमोल होती हैं।
       दो साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद डॉ. मोनिका को सिरमौर में बतौर सहायक पुलिस अधीक्षक की पहली पोस्टिंग मिली है। 27 साल की उम्र में बेटी ने न केवल पांच साल की एमबीबीएस की पढ़ाई को पूरा कर लिया था, बल्कि आईपीएस बनकर समूची लाहौल घाटी के साथ-साथ परिवार का नाम रोशन कर दिया था, क्योंकि उनसे पहले जनजातीय जिला से कोई भी महिला आईपीएस नहीं बनी थी।
      यह बताना भी लाजमी है कि माता-पिता की कोई प्रशासनिक पृष्ठभूमि नहीं थी। पिता जरनल इंश्योरैंस सेक्टर से जुड़े हुए रहे, जबकि माता गृहणी हैं। एक छोटा भाई भी अपनी बहन की कामयाबी पर बेहद खुश है,  जो बी टेक करने के बाद मुंबई में जॉब कर रहा है। परिवार कुल्लू में सैटल है।
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अपनी स्कूली फैन के साथ मोनिका।

एमबीबीएस की इंटर्नशिप के दौरान डॉ. मोनिका का मूड बदला ओर आईपीएस बनने की ठान ली। इरादे बुलंद थे, लिहाजा सफलता ने भी कदम चूमने में वक्त नहीं लगाया। सनद रहे कि पिछले कुछ सप्ताह से नशाखोरी व शराब के अवैध ट्रेड को लेकर सटीक कार्रवाई के कारण डॉ. मोनिका चर्चा में आई। इसी के बाद एमबीएम न्यूज नेटवर्क ने लेडी सिंघम बनने को तैयार युवा आईपीएस से बात करने का फैसला लिया।

       अहम बात यह है कि सिरमौर में इस वक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर युवा आईपीएस सौम्या सांबशिवन तैनात हैं। खुद बतौर एसपी पहली पोस्टिंग मिलने के बाद सौम्या यहां जन आकांक्षाओं की कसौटी पर खरा उतर रही हैं। एसपी सौम्या ने भी अपने सौम्य स्वभाव से लोगों के दिलों में जगह बनाई है, जिससे पुलिस की छवि में बड़ा बदलाव आया है।
खुद क्या बोली..
युवा आईपीएस अधिकारी का कहना है कि समाज की सुरक्षा दो तरीकों से होती है। सरहद की सुरक्षा सेना करती है तो सिविलियन्स की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के कंधों पर होती है। उनका कहना है कि लक्ष्य है कि जहां भी तैनात रहूं, वहां की जनता खुद को सुरक्षित समझें। साथ ही कहा कि नशाखोरी व महिलाओं की सुरक्षा भी कुछ अन्य प्राथमिकताएं तय की हुई हैं।
      ट्रेनिंग के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि कांगड़ा के नूरपुर में बतौर एसएचओ कार्य करने का अनुभव काफी ठीक रहा, क्योंकि सीमांत क्षेत्र होने के कारण पुलिस की जिम्मेदारी काफी ज्यादा रहती थी। उन्होंने कहा कि सिरमौर में बतौर सहायक पुलिस अधीक्षक बनकर अपनी जिम्मेदारी को निभाने का प्रयास कर रही हैं।
      एक सवाल के जवाब में  आईपीएस मोनिका का कहना है कि उन्हें सिरमौर की एसपी से काफी कुछ सीखने को मिल रहा है। यह उनका सौभाग्य है कि पहली पोस्टिंग सिरमौर में मिली है, जहां सौम्या मैम जैसी पुलिस अधिकारी एसपी के तौर पर तैनात हैं।

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