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यहां बरगद के पेड़ का भी मनाया जाता है बर्थडे, 10 साल का हो गया पेड़, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर

नाहन (रेणु कश्यप): हर साल इंसानों का बर्थडे को मनाते सभी ने सुना होगा, लेकिन एक पेड़ का भी बर्थडे मनाया जाता है, यह कम ही सुनने व पढऩे को मिलता है। आज हम अपने पाठकों को एक ऐसे ही पेड़ से रूबरू करवाएंगे, जिसका हर साल बच्चों की तरह बर्थडे मनाया जाता है। अपने परिवेश में हम तरह-तरह के जीव-जन्तु, पेड़-पौधे तथा अन्य सजीव-निर्जीव वस्तुएं पाते हैं। ये सब मिलकर पर्यावरण की रचना करते हैं, लेकिन आज पर्यावरण को ताक पर रखा जा रहा है।

पीडब्लयूडी गैस्ट हाऊस के सामने बरगद का पेड़, जिसका हर साल बर्थडे मनाया जाता है

       वहीं ठीक इसके विपरीत नाहन में एक बरगद के पेड़ का न केवल संरक्षण किया गया है, बल्कि इस पेड़ का हर साथ बर्थडे भी मनाया जाता है। साथ ही लोगों को मिठाई इत्यादि का भी वितरण होता है। पीडब्ल्यूडी गैस्ट हाऊस के सामने आज इस पेड़ की आयु 10 साल की हो गई है।

      उल्लेखनीय है कि उक्त स्थान पर सैंकड़ों साल पुराना एक बरगद का पेड़ हुआ करता था, जोकि सालों पहले गिर गया था। इस पर कुछ व्यक्तियों ने यहां पर पुन: बरगद की स्थापना करने का निर्णय लिया। राष्ट्रपति महात्मा गांधी के शहीद दिवस पर 30 जनवरी 2005 को ठीक उसी जगह बरगद व पिपल के पेड़ की स्थापना की गई, जहां पहले विशालकाय बरगद का पेड़ हुआ करता था।

      पेड़ की रोजाना पानी से सिंचाई भी की जाती है। पर्यावरण की दृष्टि से दीपक अग्रवाल, पंडित जगदीश सहित पुलिस विभाग के 2-3 कर्मियों ने पेड़ को स्थापित करने में अपनी अहम भूमिका निभाई। साथ ही वाल्मीकि सभा व अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने भी पेड़ के चारों तरफ जाली लगवाने में अपनी अहम भूमिका निभाई। आज निसंदेह यह पेड़ लोगों के लिए पर्यावरण के क्षेत्र में प्रेरणास्त्रोत जरूर बना है।

क्या कहते हैं दीपक अग्रवाल?
स्थानीय निवासी दीपक अग्रवाल बताते हैं कि जब यहां से सैंकड़ों साल पुराना बरगद का पेड़ गिर गया था, उस समय उन्होंने व पंडित जगदीश सहित अन्यों ने यहां बरगद व पीपल के पौधों को रोपा। बरगद का पेड़ तो बड़ा हो गया, लेकिन पीपल का पेड़ धीरे-धीर बड़ा हो रहा है।उन्होंने बताया कि आज से ठीक 10 साल पहले 30 अप्रैल को यह दोनों पौधे रोपे गए थे। अब उसी दिन पेड़ का बर्थडे मनाया जाता है, जिस दिन इसे रोपा गया था। उन्होंने कहा कि बरगद के पेड़ से ऑक्सीजन भी मिलती है। बाकायदा पेड़ की रोजाना पानी से सिंचाई भी की जाती है। उन्होंने लोगों से भी आह्वान कि वह भी पर्यावरण संरक्षण में बढ़चढ़ आगे आएं।

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