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#Kulu Accident : ऐसे ही जाते रहेंगे अनमोल जीवन, ये है धरताल पर देवभूमि की कड़वी सच्चाई

शिमला, 04 जुलाई : हिमाचल को लंबे अरसे से हेलिटैक्सी (HeliTaxi ) के सपने दिखाए जा रहे है। लेकिन इस बात पर गौर नहीं फ़रमाया जा रहा है कि खतरनाक सड़कों (Dangerous Roads) पर प्रदेश में अनमोल जीवन खत्म हो रहे हैं। कुल्लू में सोमवार को दर्दनाक हादसे ने सवाल उठाया है कि हेलिटैक्सी शुरू होनी चाहिए या फिर धरातल पर आम लोगों का सफर सुरक्षित होना चाहिए।

चंद महीने पहले पुलिस मुख्यालय ने एक आंकड़ा जारी किया था। इसके मुताबिक देवभूमि में 142 ब्लैक स्पॉट (Black Spots) हैं। यकीन मानिए, इसमें सबसे अधिक 30 ब्लैक स्पॉट्स अकेले कुल्लू (Kullu) में ही चिन्हित (Identified) किए गए थे। प्रश्न यह भी पैदा होता है कि क्या ब्लैक स्पॉट को लेकर सुरक्षा (Security) के प्रबंध (Arrangements) कर लिए गए हैं या नहीं। दीगर है कि हादसे के कुछ देर बाद ही देश की न्यूज़ एजेंसियो ने मरने वालो का आंकड़ा 16 बताया था लेकिन शाम को तस्वीर साफ हुई तो आंकड़ा 13 का था। केवल चालक व परिचालक ही बचे है।     

आपको बता दे कि ब्लैक स्पॉट वह जगह होती है, जहां वाहनों के गहरी खाई में गिरने की आशंका प्रबल होती है। इसे सुरक्षित बनाने के लिए क्रैश बैरियर जैसे उपाय किए जाते हैं। हाल ही में केंद्रीय  परिवहन व भूतल मंत्रालय ने नाहन व ऊना में प्रयोग के तौर पर रोलर बैरियर स्थापित किए थे। यह प्रयोग सफल होता भी नजर आ रहा है, लेकिन हिमाचल की असल खतरनाक सड़कों के किनारे यह कब लगेंगे, इसका जवाब किसी को नहीं पता। 

5 सालों के आंकड़ों में इस बात का भी पता चला था कि राज्य में 2700  सड़क हादसों में 1100 लोगों ने जान गवा दी थी। हर सड़क हादसे के बाद एक ही फैसला होता है, सरकार न्यायिक जांच के आदेश देती है, रिपोर्ट बनती है फिर ढाक के तीन पात हो जाते हैं। हर कोई सड़क हादसे को भूल जाता है। अगला हादसा होता है तो फिर सुर्खियां बन जाती हैं, लेकिन वह लोग जिन्होंने अपनों को गंवाया है, वह हादसे को ताउम्र नहीं भूल पाते। हर एक सड़क हादसे में घायल को ताउम्र के लिए जख्म मिलते हैं।

ऐसा भी देखा जाता है कि सड़क हादसे में घायल होने वाले लोग अपंगता का जीवन भी जीने पर मजबूर हो जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पूछने वाला कोई नहीं होता। कुल्लू के बंजार उपमंडल में निजी बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद वही पुराना राग अपनाते हुए मैजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। कुछ सप्ताह बाद रिपोर्ट आएगी, फिर हालात धीरे-धीरे सामान्य हो जाएंगे।

उधर, सोमवार को सड़क हादसे के बाद मौके पर लोगों का गुस्सा भी फूटा, क्योंकि मेडिकल सुविधा का अभाव तो था ही, साथ ही प्रशासनिक अमला तुरंत सक्रिय नजर नहीं आया। रिमोट इलाके में होने वाले हादसों के घायलों को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल होता है। सोचिए, एक व्यक्ति जो सड़क हादसे में पूरी तरह जख्मी हुआ, उसे खस्ताहाल सड़कों से अस्पताल पहुंचाते वक्त उसकी क्या हालत होती होगी। यह हादसा भी कई सवाल छोड़ गया है।

सरकार क्यों आपातकालीन स्थिति में घायलों को हवाई मार्ग से उच्च स्वास्थ्य संस्थानों तक ले जाने का प्रावधान नहीं करती। सड़कों पर क्रैश बैरियर को लेकर क्यों ठोस नीति नहीं बनाई जा रही। दीगर है कि कुछ अरसा पहले एक निजी कंपनी ने राज्य में हेली एंबुलेंस शुरू करने की पेशकश की थी। इसका ट्रायल भी हुआ था, लेकिन धरातल पर इसको अमलीजामा पहनाने में  सरकार ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।

दीगर है कि एमबीएम न्यूज नेटवर्क ने हाल ही में राज्य में स्कूल बसों के सुरक्षा को लेकर बनी नीति पर भी विस्तार से खबर प्रकाशित की थी। इसमें खुलासा किया गया था कि 2018 में स्कूल बसों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इन नियमों की पालना को लेकर धरातल पर कोई एक्शन नजर नहीं आता।

जख्मो पर आर्थिक मदद  हिमाचल सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। घायलों को 15-15 हजार रुपये की फौरी राहत और निशुल्क उपचार उपलब्ध किया जाएगा। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मरने वालों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की राशि देने का ऐलान हुआ है। 

वहीं हादसे में मृतकों की पहचान तनु उर्फ आर्मिना पुत्री प्रेम चंद, निवासी तुंग डाकघर बजहरा 20 वर्ष, प्रेम चंद पुत्र ज्ञान चंद गांव बगी शाड़ी, सैंज 52 वर्ष, फते चंद पुत्र झोका राम, गांव तूंग सैंज, 70 वर्ष अनीता देवी पुत्री जीत राम, गांव धारठा, सैंज, 19 वर्ष, सुशील कुमार पुत्र नीमत राम, गांव तूगं 21 वर्ष, खीम दासी पत्नी टेक राम गांव रियाहडा, 40 वर्ष, रोशी देवी पत्नी दुनी चद निवासी सेरी, 45 वर्ष, अमित कुमार पुत्र कमलेश रजक निवासी जामरा सारसा विहार,  पर्वती देवी पत्नी प्रेम चन्द तूंग,40 वर्ष, झावलू देवी पत्नी अजवीर, वजाहरा 28 वर्ष, आकाश पुत्र पंच बहादुर निवासी रागशे नेपाल 16 वर्ष, राखी माया पंच बहादुर रागशे नेपाल, संजय कुमार पुत्र शाउणू विहार (27) के रूप में हुई है।